बिना चरित्र के ज्ञान अधूरा

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सुनील सोनी

आरोन(गुना)। शासकीय महाविद्यालय आरोन में ‘‘बिना चरित्र के ज्ञान का कोई उपयोग नहीं’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन हुआ। जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों ने अपने विचार पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से व्यक्त किये। महाविद्यालय के विद्यार्थियों की तरफ से प्रथम प्रस्तुतीकरण में बीबीए के छात्र हरिओम औझा ने कहा कि एक व्यक्ति जिसके पास ज्ञान होता है पर चरित्र नहीं होता तो वह समाज को, देश को एवं एक समुदाय को कई प्रकार से प्रभावित करता है, जिससे की भृष्टाचार, गरीबी, आतंकवाद, बैरोजगारी, चोरी, डकेती जैसी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। साथ ही स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए छात्रों ने बताया कि स्वामी जी ने अपने विचारों के माध्यम से हमारे देश को पूरे विश्‍व में पहचान दिलाई और अब समय आ गया है कि हम उनके रास्‍ते पर चलकर दुनिया को बता दें कि भारत की अहमियत आज भी सर्वोपरि है।


छात्रों ने साथ ही महात्मा गांधी जी के सात ऐसे सिद्धांत पर रोशनी डाली जिनमें से प्रमुख हैं- राजनीति बिना सिद्धांत के, ज्ञान बिना चरित्र के, व्यापार बिना सामाजिक उत्तरदायित्व के, बिना कुछ किए खुशी, बिना कुछ किए धन सम्पत्ति का होना आदि। छात्र ने बताया कि हमारे ज्ञान का तब तक कोई महत्व नहीं होता जब तक हम दूसरों को वह ज्ञान न बांटें। ज्ञान का चरित्र में तभी उपयोग होता है जब वह देश के, समाज के, परिवार के विकास कार्यो में लगाता है।


द्वितीय प्रस्तुतीकरण में छात्रा कु. शोभा प्रजापति ने कहा कि ज्ञान बिना चरित्र और धर्म बिना त्याग ठीक उसी प्रकार हैं जैसे दिया बिन बाती। तृतीय प्रस्तुतीकरण में छात्रा कु. निधि चतुर्वेदी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने कार्यस्थल पर अपनी जिम्मेदारियों से विमुख होकर यदि अपने परिवार के प्रति अपना दायित्व निभाने का दाबा करता है तो वास्तविक रूप से वह अपने परिवार के साथ छल कर रहा है, क्योंकि इसका असर नकारात्मक रूप सें उसके बच्चों पर पड़ेगा जो अंततः समाज को प्रभावित करेगा। वास्तविक ज्ञान के उदाहरण स्वरूप एपीजे अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए बताया कि जब हमें वास्तविक ज्ञान होता है तो उसका स्वरूप हमारे चरित्र में झलकता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एके मुदगल ने बताया कि वास्तविक ज्ञान से ही चरित्र निर्माण होता है। अर्थात आज की आवशकता चरित्र को समझने की नहीं बल्कि ज्ञान को समझने की है जिसका तात्पर्य कुछ डिग्री हांसिल कर नौकरी पाना नहीं बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाते हुए अपने पैरों पर सम्मान सहित खड़े होना है। आज प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत आत्मावलोकन कर स्वयं की क्षमता को पहचानते हुए अवसरों का सदुपयोग करें तथा अपने कार्य को समय सीमा में निपुणता से पूरा करें।


प्राध्यापकों में श्रीमती सुषमा मुदगल ने बताया कि किसी भी व्यक्ति घटना पर अपना निर्णय न सुनायें। तथ्यों को इक्ट्ठा करना ही केवल ज्ञान नहीं है वरन् उस ज्ञान को अपने ही जीवन में उतारना व उसके अनुसार आचरण करना,  जिससे समाज को लाभ पहुंचे। किंग मार्टिन लूथर जूनियर के द्वारा कहे शब्द ‘‘हमने मिसाईलों को गाईड किया परन्तु स्वयं पथभ्रष्ट हो गए’’ को समझाते हुए चरित्र निर्माण में नैतिक शिक्षा, पर्यावरण शिक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह शिक्षाएं शाश्‍वत हैं तथा किसी भी उच्च स्तर से, कोग्निटिव ज्ञान का निरीक्षण करके हम ज्ञान को ग्रास रूट लेविल तक इम्लीमेंट कर सकते हैं तभी आने वाला भविष्य सभी के लिए सुरक्षित व सुखमय होगा। महाविद्यालय उपाध्याय ने कहा कि ज्ञान को अमल में लाना ही वास्तविक चरित्र है।


 प्रो. वीएस मीणा ने कहा कि व्यक्ति जन्म से लेकर 18 वर्ष तक चरित्रवान होता है, किन्तु इसके बाद उसमें वातावरण एवं पुस्तकों से ज्ञान की वृद्धि हो जाती है। मनुष्य के स्वभाव के कारण वह अच्छा-बुरा जानते हुए भी कभी-कभी लगत निर्णय ले लेता है इसी से उसके चरित्र की पहचान होती है। प्रो. सूर्यकान्त बरूआ ने इस अवसर पर एकलव्य जैसे शिष्य बनने के साथ-साथ गुरूद्रोणाचार्य जैसे कर्मठ गुरू का आज भी उतना ही महत्व है। कम्प्यूटर विषय के शिक्षक श्री विनीत राव कोहित ने कहा कि जब ज्ञान का इस्तेमाल अविवेकी रूप से किया जाता है तो समाज में विसंगतियां उत्पन्न होती हैं जिसका निराकरण सच्चे ज्ञान से ही हो सकता है। कु. माधवी जैन ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी आदि महापुरूषों को अगर हम आज भी याद करते हैं तो हम भी कुछ ऐसा करें कि आने वाला समाज हमें भी याद रखे।


कु. दीप्ती कलेशिया ने कहा कि ज्ञान रूपी प्रकाश का किरण पुंज जब चरित्र रूपी दर्पण पर पड़ता है तो वह परावर्तित होकर सम्पूर्ण समाज को दीप्तमान करता है। कु. श्वेता सक्सैना ने बाल्मीकि जी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हमें आत्म ज्ञान हो जाता है तो हम समाज पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं। यह कार्यक्रम लगभग 150 विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय स्टाफ की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।




कार्यक्रम में प्रमुख रूप में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डा. प्रबोध जोशी, श्री धीरज अग्रवाल, श्री मोहनलाल सूर्यवंशी, श्री सेंगर (संचालक आकार कॅरियर काउंसलर गुना) उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जीएल रावल ने किया एवं कहा कि हम समय-समय पर एसे कई कार्यक्रम करते है जिनसे हमारे महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अपने सुनहरे भविष्य के लिए प्रेरणा मिलती है।


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